ज़िन्दगी


मैं अकेला चल रहा हूँ , मुझे एक हमसफ़र चाहिए
मेरी ज़िन्दगी की घड़ियों  को एक रहगुज़र चाहिए
मेरे अरमानों को एक रहनुमा चाहिए
आदतन तनहा हु, तन्हाई से बेवफाई चाहता हूँ
मेरे खुदा मैं तेरा  , सिर्फ एक दफा मंज़र चाहता हूँ

मेरी चाहतों को रौंदने वालों , मैं  हर एक पे की सेहर चाहता हूँ
मुझमे बसने वालों , तुम्हे माना है खुदा , तुम्हे सिजदा दिया है हर मोड़ पे
मरी दुआओं का मेरे खुदा , मैं  असर चाहता हूँ
मैं अकेला चल रहा हूँ , मैं  ज़िन्दगी में एक मुकाम चाहता हूँ
ऐ खुदा मैं तेरा मंज़र चाहता हूँ
तेरे दर से मैं खुशनसीब के चंद फूल चाहता हूँ
क्या माँगा है मैंने बहुत , जो मेरे खुदा को मंज़ूर नहीं ?
क्यों मेरा अब खुदाई पे एतबार नहीं
मैं फिर भी तेरा दीदार चाहता हूँ,
हो न हो इसी ज़िन्दगी में तेरा चमत्कार चाहता हूँ,
हां मैं तुझसे हे ऐ खुदा मेरा प्यार चाहता हूँ

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